तुम एक गोरखधंधा हो …

खास पेशकश: नुसरत फ़तेह अली साहब द्वारा गाये गए इस बेहतरीन सूफी कलाम का मज़ा लीजिये … इस कलाम के रचयिया नाज़ ख़िल्वी साहब हैं, जो पाकिस्तान रेडियो में प्रोडूसर थे… कमाल का लिखा है … नुसरत साहब ने गाया भी बेजोड़ है …   कभी यहाँ तुम्हें ढूँढा, कभी वहाँ पहुँचा, तुम्हारी दीद की…

रुबाब-तबला जुगलबंदी

पेश है  आफगानिस्तान के ‘रुबाब’ -नवाज़ उस्ताद मोहम्मद उमर और भारत के मशहूर तबला-नवाज़ उस्ताद जाकिर हुसैन की एक दुर्लभ जुगलबंदी … यह रिकॉर्डिंग 1974 ई में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के एक कॉन्सर्ट की है, जिसे बाद में एक अलबम की तरह जारी किया गया था … युवा जाकिर हुसैन और मोहम्मद उम्र पहली बार इसी कार्यक्रम…