एक जरूरी कविता …

देश में चुनाव संपन्न हुए , नयी सरकार बनी … ऐसे हालात में  उदय प्रकाश जी की इस कविता का पाठ  बेहद प्रासंगिक है : तानाशाह / उदयप्रकाश वह अभी तक सोचता हैकि तानाशाह बिल्‍कुल वैसा ही याफिर उससे मिलता-जुलता ही होगायानी मूंछ तितलीकट, नाक के नीचेबिल्‍ले-तमगे औरभीड़ को सम्‍मोहित करने की वाकपटुता जबकि अब होगा यह…